ऊपर उल्लेखित कारणों के चलते शेयर बाजार में निवेश करने वाले लाखों निवेशकों के पास अभी भी भौतिक रूप [ फिजिकल फॉर्म ] में ही कंपनियों के शेयर पड़े हैं। समाचार पत्रों [ समय समय पर जो पढने मिला ] अनुसार इस समय देश में करीब 2.70 लाख करोड़ रुपये के शेयर भौतिक रूप में हैं| इसलिये सरकार को पहले बुनियादी समस्याओं को हल करना चाहिये अन्यथा कड़ी मेहनत से किया गया निवेश शून्य में परिवर्तित हो जायेगा जिसके चलते ईमानदार छोटे वरिष्ठ शेयर निवेशक इसको अपने प्रति विश्वासघात के रूप में लेंगे।
समस्याओं के निदान हेतु कुछ सुझाव ---
A] पहले नाम यानि जिसका नाम प्रथम हो उसे संयुक्त नामों में रखे गए भौतिक शेयरों को अपने नाम में डीमैट की अनुमति दी जाय भले ही उसके लिये किसी भी प्रकार का फॉर्म भरवा लिया जाय या सादे कागज पर ऐफिडेविट ले लें।
B] कारपोरेट कार्य मन्त्रालय [MCA] के साथ ही भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड ( सेबी ) के वेब में सभी कम्पनियों का नाम होना चाहिए यानि जिस नाम से सबसे पहले कम्पनी सूचीबद्ध हुयी उसी से शुरू हो | फिर उसमेंं हर प्रकार के बदलाब का भी पूरा पूरा उल्लेख हो ताकि निवेशक को बिना ज्यादा दिक्कत के जिस तरह भी ढूंढे उसे सही जानकारी मिल जाय |
C] जो शेयर खो गये हैं उसके लिये प्रक्रिया में ढील दी जाय यानि
अ) ऐफिडेविट प्रक्रिया सादे कागज पर मान्य कर दी जाय जबकि इन्डेमनिटी किसी भी मूल्य के उपलब्ध स्टाम्प पेपर पर । सभी का यह मानना है कि 10/- के स्टाम्प पेपर पर वाले की मान्यता / बाध्यता उतनी ही होती है जितनी की 500/- वाले स्टाम्प पेपर पर किये गये की ।
ब) प्रथम सूचना रिपोर्ट की आवश्यकता हटा दी जाय यानि सम्बंधित थाने में रजिस्ट्री से सूचना भेजी उसकी स्वहस्ताक्षरित कापी के साथ रजिस्ट्री की रसीद लेलें।
स) विज्ञापन करने का दायित्व व खर्चा कम्पनीयों पर ही होना चाहिये यानि कम्पनीयाँ चाहें तो नज़रअंदाज़ भी कर सकें और इस तरह के शेयर भौतिक रूप में जारी ही न किये जाँय बल्कि एक म्यूचूअल फंड की तरह होल्डिंग पत्र जारी कर दे । और होल्डिंग पत्र के अन्त में डीमेट में जमा देने हेतु कॉलम हो जिसे आवश्यकता पड़ने पर [कालान्तर में] हस्ताक्षर कर डीमेट करवाया जा सके।
द] वरिष्ठों के हस्ताक्षर वाली समस्या का निदान कुछ हद तक किया गया है लेकिन अभी भी स्पष्ट दिशा निर्देश जारी करने की आवश्यकता है क्योंकि लम्बा समय बाद ढलती उम्र में हस्ताक्षर में फर्क आयेगा ही लेकिन हर हालात में शैली, ढ़ंग, प्रवाह और भाषा तो मिलेगी ही।
ई] छोटे वरिष्ठ शेयरधारकों को अपने संयुक्त धारक से एक बार हस्ताक्षर लेना पडे यानि बार बार हस्ताक्षर की आवश्यकता नहीं पडे ताकि वह आसानी से डीमेट प्रक्रिया पूरी कर सके। आवश्यक हो तो इस प्रक्रिया के लिये एक उचित फॉर्मेट तैयार कर सभी को मानने के लिए आदेशात्मक सूचना जारी कर दे।
D] बहुत से शेयर केवल सी डी एस एल पर ही डीमेट हो सकते हैं।उसी प्रकार कुछ ऐसे भी शेयर होते हैं जो केवल एन एस डी एल पर ही डीमेट हो सकते हैं ।
आवश्यक डीमेट के चलते सभी शेयर निवेशकों का किसी एक डिपाजिटरी में तो खाता होना अनिवार्य है जो होता भी है। इसलिये छोटे कम मुल्य वाले शेयरों को डीमेट करवाने में अतिरिक्त सालाना खर्चे के चलते डीमेट करवाना बुद्धिमत्ता नहीं ।
हालांकि सेबी ने एक बेसिक सर्विसेज डीमेट खाता की सुविधा चालू कर रखी है लेकिन उदाहरण के तौर पर यदि किसी का एन एस डी एल में डीमेट खाता है तब सी डी एस एल में बेसिक सर्विसेज डीमेट खाता खुल नहीं सकता।यह नियम भी छोटे कम मुल्य वाले शेयरों को डीमेट करवाने में बाधक है।
इस नियम में भी संशोधन अतिआवश्यक है ताकि एन एस डी एल में डीमेट खाता है तो भी सी डी एस एल में बेसिक सर्विसेज डीमेट खाता खुल जाय अथवा जैसा ऊपर उल्लेख किया गया है निवेशकों को भौतिक शेयरों के बदले एक म्यूचूअल फंड की तरह होल्डिंग पत्र जारी कर दे अर्थात जब भी निवेशक चाहे उस होल्डिंग पत्र पर हस्ताक्षर कर डीमेट करवा ले। इसी तरह पता संशोधन हो, बैंक खाता संशोधन या नामांकित [ नॉमिनी ] बदलना हो तो उस होल्डिंग पत्र पर हस्ताक्षर कर नया संशोधित होल्डिंग पत्र जारी हो जाय ताकि बाजार से भौतिक शेयरों का सफाया सुगमता से होता रहे ।
सरकार/ सेबी/ स्टॉक एक्सचेंज उपरोक्त उल्लेखित सभी प्रकार की समस्याओं को दूर कर सकते हैं जैसे अभी दो तीन साल पहले ही इन्कमटैक्स विभाग ने रिटर्न में असूचीबद्ध कम्पनियों का पैन [ PAN ] नंबर के साथ सूची की अनिवार्यता की लेकिन जब उन्हे यह बताया / समझाया गया कि वाणीज्यिक विभाग के साइट पर भी यह उपलब्ध नहीं है तब इसमें छूट दे राहत प्रदान की।
कृपया ध्यान रखें छोटे वरिष्ठ शेयरधारकों के पास सभी नियमोंं का पालन करने के लिए इतनी ऊर्जा नहीं है और हर कदम पर खर्चों के अलावा बार-बार यात्रा की आवश्यकता होती है [कृपया ध्यान दें कि जो लोग प्राइवेट फर्मों से सेवानिवृत्त हुए हैं उनको पेंशन नहीं है इसलिए उनके पास आय का बहुत कम स्रोत है]|
इसी तरह और भी समस्यायें हैं उदाहरणार्थ किसी कारण से सात साल यदि डिवीडेंड का या तो पता नहीं चला या डिवीडेंड जमा नहीं कराया तो
डिवीडेंड रकम के साथ साथ भौतिक शेयर भी सेबी [ विनिधानकर्ता (निवेशक) संरक्षण और शिक्षण निधि [ IEPF ] में सरकार के खाते में जमा हो जाता है भले ही आपके अपने नाम वाले शेयर भौतिक अवस्था में आपके पास रखे हों।
सभी सम्बन्धित अधिकारियों को यह समझना चाहिये कि छोटे वरिष्ठ निवेशक डीमेट कराने की चाहत रखते हुए भी लाचार हैं और समस्याओं का उचित समाधान ही सम्पूर्ण लक्ष्य प्राप्त करवा देगा और इसी उद्देश्य के लिये मैंने ऐसा तरीका सुझाया है जिससे कम समय में ही लक्ष्य प्राप्त कर पायेंगे क्योंकि जो भी भौतिक शेयर कम्पनी के पास आयेगा उसे लौटाना तो है ही नहीं
बल्कि एक म्यूचूअल फंड की तरह होल्डिंग पत्र जारी कर देना है । और होल्डिंग पत्र के अन्त में डीमेट में जमा देने हेतु कॉलम हो जिसे कालान्तर में हस्ताक्षर कर डीमेट करवाया जा सके।